| 1 |
Pus ki raat me Jabra: Pashu charitra ke madhyam se manveey samvedna ka yatharthavadi vistar |
Prashant Mishra, Pavan Kumar Trivedi |
The Academic |
2026 |
| 2 |
सामाजिक परिवर्तन में हिंदी सिनेमा का योगदान |
DR MANU PRATAP |
समागम शिवाजीनगर, भोपाल फरवरी 2026 |
2026 |
| 3 |
Hindi Kavya me Maun ki avdharna aur uski Saundaryatmak Abhivyakti |
Pavan Kumar Trivedi |
Krishna Basanti |
2025 |
| 4 |
Lok vyavahar me saral manak Vaigyanik evm Takniki Shabdavali ki Upyogita |
Pavan Kumar Trivedi |
Shabdarnav |
2025 |
| 5 |
Nirala ke Sahitya par Tulsi ka Prabhav |
Pavan Kumar Trivedi |
Vedanjali |
2025 |
| 6 |
Teerth Nagari Kamli kya ko ek Dharmik evn Sanskritik Paryatan sarkit ke rup me viksit karne ki sambhavnayen evm chunautian |
Rajat Gangwar, Pavan Kumar Trivedi |
Vedanjali |
2025 |
| 7 |
कालीचरण स्नेही के काव्य में दलित साहित्य की अवधारणा एवं स्वरूप |
DR MANU PRATAP |
AKSHARWARTA |
2025 |
| 8 |
डॉ श्योराज सिंह बेचन के काव्य में दलित चेतना |
DR MANU PRATAP |
KRISHNA BASANTI |
2025 |
| 9 |
रामचरितमानस में श्रीराम |
DR MANU PRATAP |
SAMVET |
2025 |
| 10 |
शोध और अनुवाद की घनिष्ठता |
DR MANU PRATAP |
ANUVAD PARISHAD |
2025 |
| 11 |
श्रृंखला की कड़ियां एक पुर्नमूल्यांकन |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नईम |
हिन्दुस्तानी त्रैमासिक |
2025 |
| 12 |
हिंदी समृद्ध कहावत लोकोक्ति संसार और डॉ शरद |
DR MANU PRATAP |
AKSHARWARTA |
2025 |
| 13 |
हिन्दी काव्य में छंद विधान |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नईम |
शोध-ऋतु |
2025 |
| 14 |
Bharat ki Arthik Pragati me Kisan ka Yogdaan |
Pavan Kumar Trivedi |
Aksharwarta |
2024 |
| 15 |
Hindi Kahani me Purvadeept shaili: Aitihasik Vikas, Sanrchnatmak vinyas aur Manovaigyanik prabhav |
Pavan Kumar Trivedi |
Aksharwarta |
2024 |
| 16 |
Nayi Shiksha Neeti Aur Matribhasha |
Pavan Kumar Trivedi |
Shodh Rityu |
2024 |
| 17 |
Rekhachitra aur Gillu |
Pavan Kumar Trivedi |
Shodh Rityu |
2024 |
| 18 |
दिव्यांग छात्रों की समस्याएं और समावेशी शिक्षा |
DR MANU PRATAP |
SANSHODHAK |
2024 |
| 19 |
पर्यावरणीय चिंतन और पंत का काव्य |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नईम |
वर्ल्डवाइड इंटरनेशनल इंटर डिसिप्लिनरी रिसर्च जर्नल |
2024 |
| 20 |
महादेवी वर्मा के काव्य में रहस्यवाद और यथार्थवाद का द्वंद्व |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नाइम |
जूनी ख्यात |
2024 |
| 21 |
मुर्दहिया एक दलित चेतना: डॉ. तुलसीराम |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नईम |
विद्यावार्ता |
2024 |
| 22 |
हिन्दी नाटक और किन्नर-विमर्श |
युगल |
शोधसंहिता (UGC CARE Group I, vol.XI, Issue-I (II), January-June, |
2024 |
| 23 |
Paryavaran Ka Samvardhan Aur Sarakshan : Sahitya Ke Jharokhe Se |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Aksharwarta |
2023 |
| 24 |
Vaishvik Paridrishya Me Sahitya Aur Samaj |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Shodh Rityu |
2023 |
| 25 |
अमरकांत के उपन्यासों की भाषिक संरचना |
संदीप कुमार शुक्ल, डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
अयन |
2023 |
| 26 |
उदय प्रकाश की कहानी वारेन हेस्टिंग्स का सांड और फैंटेसी |
डॉ. फ़हीम अहमद |
विद्यावार्ता |
2023 |
| 27 |
एक माँ और बेटे की संघर्ष गाथा : 'माँ और मैं' |
Dr. Mohd. Arshad Khan |
सृजनलोक |
2023 |
| 28 |
नियुक्तियों का खेला बनाम 'धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे' |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसंदेश टाइम्स , मंथन, 8 अक्टूबर |
2023 |
| 29 |
हिंदी उपन्यास और 1857 का संघर्ष |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
गगनांचल |
2023 |
| 30 |
हिंदी के भक्ति साहित्य में योग: आधुनिक समाज में योग की उपदेयता |
Prof. Kanchan singh |
Printing area research journal |
2023 |
| 31 |
हिंदी दलित कविता के सरोकार |
डॉ. फ़हीम अहमद |
बोहल शोध मंजूषा |
2023 |
| 32 |
हुए हम जिनके लिए बर्बाद |
डॉ अल्पना सिंह |
स्वनिम, सृजन और शोध की संदर्भिक एवं पूर्व- समीक्षित त्रैमासिक पत्रिका, प्रकाशक गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ |
2023 |
| 33 |
Adhe-Adhoore Natak : Poornata Kee Talash Me Adhoora Vyaktitva |
Dr. Om Prakash Singh |
Shodh Disha |
2022 |
| 34 |
Critiquing the post secondary education and growth of students in public institutions |
Dr. Anju Bansal (Second Author) |
INTERNATIONAL RESEARCH JOURNAL OF COMMERCE, ARTS AND SCIENCE |
2022 |
| 35 |
Mohan Rakesh Ke Natakon Me Adhunik Bhav-Bodh |
Dr. Om Prakash Singh |
Shodh Disha |
2022 |
| 36 |
MUKTIBODH KE KAVYA ME SAMVEDNA KE SWAR |
DR. ARUN KUMAR |
SHODH DISHA |
2022 |
| 37 |
Prayojanmulak Bhasha Ki Mahatta |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Vedanjali |
2022 |
| 38 |
VAYVASTHIT SAMAJ KE ADHAR STAMBH, VIVEKANAND JI KI DRISHTI MEIN |
DR. DARAKHASHAN BEE |
WORLD WIDE INTERNATIONAL INTER DICIPLINARY RESEARCH JOURNAL ( A PEER REVIEWED) |
2022 |
| 39 |
Vigyan Ka Prabhav Samaj Aur Sanskriti Par |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Shabdarnav |
2022 |
| 40 |
आजादी के पश्चात महिला साहित्यकारों के कथा संसार में स्त्री पात्र |
डॉ.वंदना |
मानव विज्ञान विमर्श |
2022 |
| 41 |
आतंक और दहशत से परे कश्मीर की दुनिया |
डॉ अल्पना सिंह |
अनुसंधान (Peer Reviewed International Journal) |
2022 |
| 42 |
आधुनिक कथा-साहित्य में कहानी का विकास |
ARVIND KUMAR |
SHODHAYAN |
2022 |
| 43 |
आधुनिक कथा-साहित्य में कहानी का विकास |
ARVIND KUMAR |
SHODHAYAN |
2022 |
| 44 |
इक्कीसवीं सदी की नींव का निर्माण करती कहानियां |
डॉ अल्पना सिंह |
माटी |
2022 |
| 45 |
इतना आसां भी नहीं मन्नू होना |
डॉ अल्पना सिंह |
उत्तर प्रदेश (मासिक), मन्नू भंडारी विशेषांक, अंक-41-43, UGC CARE |
2022 |
| 46 |
एक आग का दरिया था और डूब कर जाना था |
डॉ अल्पना सिंह |
पाखी |
2022 |
| 47 |
कमलेश्वर का 'नई कहानी' लेखन में मानवीय संवेदनात्मक निरूपण |
ARVIND KUMAR |
सम्मेलन -पत्रिका |
2022 |
| 48 |
कमलेश्वर का 'नई कहानी' लेखन में मानवीय संवेदनात्मक निरूपण |
ARVIND KUMAR |
सम्मेलन -पत्रिका |
2022 |
| 49 |
जीवन की लम्बी यात्रा का साक्षी : टेबल लैम्प |
डॉ अल्पना सिंह |
हंस UGC CARE |
2022 |
| 50 |
'थोड़ा सरकिए, बच्चों को जगह दीजिए' |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
कला वसुधा |
2022 |
| 51 |
नई पीढ़ी का भारत और समकालीन हिंदी बाल काव्य |
डॉ. फ़हीम अहमद |
अक्षरा |
2022 |
| 52 |
नवां दशक और महेंद्र कार्तिकेय का काव्य शिल्प |
डॉ निशात बानो |
श्रंखला एक शोधपरक वैचारिक पत्रिका |
2022 |
| 53 |
पत्रकारिता और साहित्य |
Dr. Anju Bansal |
शोधादर्श |
2022 |
| 54 |
प्रेमचंद का अद्भुत नारी चरित्र मुन्नी |
डॉ. फ़हीम अहमद |
अक्षरा |
2022 |
| 55 |
प्रेमचंद साहित्य की भाषा |
DR.VANDANA |
HUMANITY - SCIENCE INTERFACE |
2022 |
| 56 |
भारतीय संस्कृति के दर्पण में विदुर नीति |
Dr. Anju Bansal |
आधुनिक साहित्य |
2022 |
| 57 |
महादेवी वर्मा का गद्य साहित्य |
डॉ निशात बानो |
इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ़ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस |
2022 |
| 58 |
मैत्रेयी पुष्पा के कथा साहित्य में नारी शोषण के प्रति विद्रोह |
DR.VANDANA |
ANTHOLOGY THE RESEARCH |
2022 |
| 59 |
रणेंद्र के उपन्यास : आख्यान में सत्ता विमर्श |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
विश्वभारती |
2022 |
| 60 |
वर्तमान संदर्भ में महाकाव्य महाभारत में विदुर नीति की प्रासंगिकता |
Dr. Anju Bansal |
शोध दिशा |
2022 |
| 61 |
सूफी संत और कौमी एकता |
डॉ. शशि प्रभा |
शोध दिशा |
2022 |
| 62 |
है अँधेरी रात पर दीया जलाना कब मना है |
डॉ अल्पना सिंह |
हिन्दुस्तानी त्रैमासिक UGC CARE |
2022 |
| 63 |
CHARYA RAMCHANDRA SHUKL JI KE NIBANDH |
DURGESH KUMAR RAI |
SHODH SANCHAR BULLETIN |
2021 |
| 64 |
JANSANCHAR ME HINDI KI BHOOMIKA |
DR. ARUN KUMAR |
PERIODIC RESEARCH |
2021 |
| 65 |
KINNAR VIMARSH ITIHAS AUR SAMAJ KE SANDARBH MEIN |
SADHANA |
BOHAL SHODH MANJUSHA |
2021 |
| 66 |
Literature as a Tool of Stress Management |
Dr. Anju Bansal |
Journal Global Values |
2021 |
| 67 |
MUKTIBODH KE KAVYA ME PRATEEK VIDHAN |
DR. ARUN KUMAR |
SHODH DRISTI |
2021 |
| 68 |
Pragativadi Andolan ki Purva Peethika |
2395-5104 |
Shabdarnav |
2021 |
| 69 |
Sahitya Ke Sath Gramya Vikas |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Vedanjali |
2021 |
| 70 |
आंचलिक कहानीकार रेणु की कहानियों का कथ्य एवं शिल्प |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
The International Journal of Analytical and Experimental Modal Analysis |
2021 |
| 71 |
आदर्श समाज : तुलसी की दृष्टि में |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
शोध मंथन |
2021 |
| 72 |
इक्कीसवीं शताब्दी का हिंदी बाल काव्य दिशा और दृष्टि |
डॉ. फ़हीम अहमद |
शोध समीक्षा |
2021 |
| 73 |
उच्च शिक्षा का नवपरिवर्तित रूप |
Dr. Anju Bansal |
शोधायतन |
2021 |
| 74 |
औपन्यासिक यात्रा और सूरज का सातवां घोड़ा |
डॉ निशात बानो |
EDUCATION TODAY |
2021 |
| 75 |
कथा- लेखिका शिवानी : कहानी-रचना एवं नारी- चिन्तन |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
INTERNATIONAL JOUNAL OF HINDI RESEARCH |
2021 |
| 76 |
कविता में प्रतिरोध रचते कवि का हलफनामा |
डॉ अल्पना सिंह |
कविता विहान |
2021 |
| 77 |
कहानीकार मार्कण्डेय : एक विश्लेषण |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध सरिता |
2021 |
| 78 |
कहानीकार शेखर जोशी की कहानियाँ : आंचलिकता के दायरे में |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दृष्टि |
2021 |
| 79 |
कुंभ में कल्पवास से मोक्ष द्वार तक |
, |
भावक |
2021 |
| 80 |
जाने ये राहें अब ले जाएँगी कहाँ |
डॉ अल्पना सिंह |
वांग्मय (Peer Reviewed Journal) |
2021 |
| 81 |
जीवन मूल्यों का संसार रचती बाल कहानियाँ |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
शोध दिशा |
2021 |
| 82 |
तुलसी की साहित्यिक प्रतिभा |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
शोध संदर्श |
2021 |
| 83 |
त्रिलोचन के कथा साहित्य में मानवीय संवेदनाओं की प्रासंगिकता |
ARVIND KUMAR |
दृष्टिकोण |
2021 |
| 84 |
त्रिलोचन के कथा साहित्य में मानवीय संवेदनाओं की प्रासंगिकता |
ARVIND KUMAR |
दृष्टिकोण |
2021 |
| 85 |
दुश्चक्र में सृष्टा: प्रकृति की विराटता का स्वरूप |
ARVIND KUMAR |
SAMBODHI |
2021 |
| 86 |
दुश्चक्र में सृष्टा: प्रकृति की विराटता का स्वरूप |
ARVIND KUMAR |
SAMBODHI |
2021 |
| 87 |
दूधनाथ सिंह की भी कथा का कोई अंत नहीं |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसंदेश टाइम्स, मंथन पृष्ठ, 12 जनवरी |
2021 |
| 88 |
द्वार के आगे और द्वार की खोज में अज्ञेय |
- |
साहित्य भारती |
2021 |
| 89 |
नरेन्द्र कोहली की कहानियों का रचना-विधान |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
JOURNAL OF INTERDISCIPLINARY CYCLE RESEARCH |
2021 |
| 90 |
नरेन्द्र कोहली के पाँच एब्सर्ड उपन्यास : वर्तमान सन्दर्भ में |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दृष्टि |
2021 |
| 91 |
नाट्य साहित्य में अभिनय की अवधारणा |
DR. ALOK MISHRA |
SHODH SAMAGAM |
2021 |
| 92 |
पर्यावरण का राहु : प्लास्टिक |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
Aryavart shodh vikas patrika |
2021 |
| 93 |
बदलते परिप्रेक्ष्य मे साहित्य और समाज |
Dr. Anju Bansal |
शोध मंथन |
2021 |
| 94 |
बुझाहूँ मोर गियाना |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
दैनिक जागरण [समाचार -पत्र] |
2021 |
| 95 |
भारतीय साहित्य में अभिनय का स्वरुप |
DR. ALOK MISHRA |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2021 |
| 96 |
भारतेंदु के अनुवाद सम्वन्धी विचार एवं प्रक्रिया विश्लेषण |
डॉ मोहन बैरागी |
अक्षर वार्ता |
2021 |
| 97 |
मन्नू भण्डारी की कहानियाँ : एक संदृष्टि |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध- दृष्टि |
2021 |
| 98 |
मानवाधिकार के परिपेक्ष में स्त्री |
, |
ATARAXIA |
2021 |
| 99 |
रचना धर्मी कृष्णा सोबती : कहानी-लेखन एवं स्त्री विमर्श |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दिशा |
2021 |
| 100 |
रचनाकार मोहन राकेश और उनकी प्रतिनिधि कहानियाँ |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दृष्टि |
2021 |
| 101 |
लोक के सत्य का साहित्य |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
आजकल |
2021 |
| 102 |
वीरेन डंगवाल की कविताओं में मानवीय संवेदनाओं का अनुशीलन |
ARVIND KUMAR |
KALA SAROBAR |
2021 |
| 103 |
वीरेन डंगवाल की कविताओं में मानवीय संवेदनाओं का अनुशीलन |
ARVIND KUMAR |
KALA SAROBAR |
2021 |
| 104 |
वृद्धों का आदर करे |
Dr. Anju Bansal |
शोधादर्श |
2021 |
| 105 |
संत समाज को समझने की दृष्टि |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
दैनिक जागरण [समाचार पत्र ] |
2021 |
| 106 |
समकालीन कहानी और महिला कहानीकार |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध संचार बुलेटिन |
2021 |
| 107 |
सामंतवाद विरोधी चेतना और कबीर की समालोचना |
डॉ. फ़हीम अहमद |
बौद्धिक भारत |
2021 |
| 108 |
सुन्नर पांडे की पतोह में प्रतिबिंबित समाज |
डॉ निशात बानो |
EDUCATION TODAY |
2021 |
| 109 |
स्त्री संघर्ष से विमर्श तक |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
जनसत्ता [समाचार -पत्र] |
2021 |
| 110 |
हाथी के दांत: खाने के और दिखने के और |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
लमही |
2021 |
| 111 |
हिंदी का नवजागरण काल और स्वतंत्रता |
Dr. Anju Bansal |
शोध मंथन |
2021 |
| 112 |
हिन्दी कहानी की आंचलिकता और कहानीकार बलवन्त सिंह |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
सांस्कृतिक और सामाजिक अनुसंधान (अन्तर्राष्ट्रीय जनरल) |
2021 |
| 113 |
हिन्दी भाषा एवं साहित्य का उन्नयन : एक विमर्श |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
शोध मंथन |
2021 |
| 114 |
हिन्दी-पत्रकारिता एवं बीसवीं सदी के प्रथम दो दशक |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
The International Journal of Analytical and Experimental Modal Analysis |
2021 |
| 115 |
ALPCHARCHIT KRISHN BHAKT KAVI - DHRUV DAS |
SADHANA |
KASHF |
2020 |
| 116 |
DEOBAND KE ACHINHE KRISHN BHAKT |
SADHANA |
KASHF |
2020 |
| 117 |
Internet and Education Development |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
Vidyawarta |
2020 |
| 118 |
अज्ञेय के उपन्यास 'नदी के दवी्प 'की नायिका रेखा की आधुनिकता |
सविता मिश्रा औश्र करूणा सिंधु |
इंडियन जर्नल आफ सोशल कंसंर्स |
2020 |
| 119 |
अपनी जमीं अपना आसमां |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हंस |
2020 |
| 120 |
उपन्यास आलोचना का लोकतंत्र |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
शोध दिशा |
2020 |
| 121 |
कौन सुनेगा किसको सुनाएँ |
डॉ अल्पना सिंह |
लमही UGC CARE |
2020 |
| 122 |
गान्धीयुगीन पत्रकारिता और उसकी प्रासंगिकता |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दिशा |
2020 |
| 123 |
धर्म और सत्ता के विरुद्ध लड़ती बेशरम स्त्रियाँ |
डॉ अल्पना सिंह |
हंस UGC CARE |
2020 |
| 124 |
प्रवासी साहित्यकार अभिमन्यु अनत के उपन्यासों में मानव: वेदना |
, |
प्रवासी जगत |
2020 |
| 125 |
भारतीय समाज एवं दलित साहित्य |
डॉ निशात बानो |
EDU CARE |
2020 |
| 126 |
महिला उपन्यासकारों की दृष्टि में स्त्री विमर्श |
डॉ निशात बानो |
EDU WORLD |
2020 |
| 127 |
रामचरितमानस में वर्णित अंतर कथाएं : एक समीक्षा |
|
शोध धारा उरई जालौन |
2020 |
| 128 |
रूहेलखंड के बाल साहित्य में अभिव्यक्त पारिवारिक मूल्यों के सन्दर्भ |
DR. ALOK MISHRA |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2020 |
| 129 |
लोक नाट्य : एक परिचय |
DR. ALOK MISHRA |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2020 |
| 130 |
शेखऱ जोशी की कहानियाँ एवं मध्यवर्ग |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
परिशोध |
2020 |
| 131 |
संचार माध्यम, बालक और बाल साहित्य |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
साक्षात्कार |
2020 |
| 132 |
सामान्य जीवन के उत्सव और उल्लास की कहानी |
डॉ अल्पना सिंह |
लमही UGC CARE |
2020 |
| 133 |
स्त्री -समस्याओं पर नवजागरणकालीन स्त्री साहित्यकारों की दृष्टि |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
गगनांचल |
2020 |
| 134 |
हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार एवं भारतेंदु हरिश्चन्द्र के विचार |
Dr.Naresh sihag advocate |
बोहल शोध मंजूषा |
2020 |
| 135 |
हिंदी सहित्य में नारी |
डॉ निशात बानो /डॉ अरुण कुमार |
इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी |
2020 |
| 136 |
‘भारत की भावात्मक एकता और हिन्दी साहित्य’ |
|
'भावक': अध्यापक शिक्षा-विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा |
2019 |
| 137 |
AADHUNIK KAHANION ME DALIT CHETNA KE SWAR |
DR. ARUN KUMAR |
REMARKING AN ANALISATION |
2019 |
| 138 |
BACHCHAN KE KAVYA ME PRATEEK VIDHAN |
DR. ARUN KUMAR |
REMARKING AN ANALISATION |
2019 |
| 139 |
KANGRA JANPAD KA LOKNATYA |
SADHANA |
KASHF |
2019 |
| 140 |
KRISHNA KAVYA ME SAUNDARYA BODH |
DR. ARUN NKUMAR |
PERIODIC RESEARCH |
2019 |
| 141 |
Pragatisheel Kavya Parampara Aur Trilochan |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Shodh Disha |
2019 |
| 142 |
RAMCHARIT MANAS ME SAUNDARAY VIDHAN |
DR. ARUN KUMAR |
SRINKHALA EK SHODHPARAK VAICHARIK PATRIKA |
2019 |
| 143 |
SAMAJIK SAMANVAY KE UTPRERAK KABIR |
DR BEENA RUSTAGI |
ITIVRITA SRIJAN |
2019 |
| 144 |
SAMAJIK SANCHETNA ME MAHARISHI DAYANAND SARASWATI KA YOGDAN |
DR BEENA RUSTAGI |
SAMAJ VIGYAN SHOD PATRIKA |
2019 |
| 145 |
Yatharthvaad Aur Trilochan |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
Shodh Drishti |
2019 |
| 146 |
अतीत और वर्तमान से मुक्त निरे भविष्य की महागाथा |
डॉ अल्पना सिंह |
पाखी |
2019 |
| 147 |
अतीत और वर्तमान से मुक्त निरे भविष्य की महागाथा |
डॉ अल्पना सिंह |
पाखी |
2019 |
| 148 |
अनबूझ मोड़ से भी राहें गुज़रती हैं |
डॉ अल्पना सिंह |
लमही UGC CARE |
2019 |
| 149 |
आधुनिक उपन्यास और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण |
डॉ निशात बानो |
इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ़ मैनेजमेंट सोशियोलोजी एंड ह्यूमैनीटीज़ |
2019 |
| 150 |
आधुनिक हिन्दी के प्रवर्तक : भारतेन्दु हरिश्चंद्र |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
JETIR |
2019 |
| 151 |
आधुनिकता का लोकपक्ष और साहित्य |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हंस |
2019 |
| 152 |
उजास भरी जिंदगी के सपने दिखाती प्रकाश मनु की कवितायें |
सविता मिश्रा |
इंडियन जर्नल आफ सोशल कंसंर्स |
2019 |
| 153 |
उत्तरशती के विमर्श का आख्यान |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हंस |
2019 |
| 154 |
कला से कविता का सृजन करता कवि |
डॉ अल्पना सिंह |
जनकृति |
2019 |
| 155 |
जीवन राग और अनबीते व्यतीत की मृत्युकथा |
डॉ अल्पना सिंह |
समालोचन |
2019 |
| 156 |
निराला की प्रमुख व्यंग्य रचनायें |
DR. ALOK MISHRA |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2019 |
| 157 |
पराजित नायकत्व के दौर में |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2019 |
| 158 |
पुराने अंधेरे को जड़ से उखाड़ फेंकने की कोशिश करती चंद्रकांत देवताले की कविताएं |
सविता मिश्रा |
वितस्ता |
2019 |
| 159 |
भक्ति काव्य की नवीनता |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
आलोचना |
2019 |
| 160 |
भरी बहार में गुलशन वीराना है |
डॉ अल्पना सिंह |
समागम (Refereed Research Journal) |
2019 |
| 161 |
भाषा और गाँधी |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (वार्षिक अंक) |
2019 |
| 162 |
भाषा में मुहावरे एवं लोकोक्तियों का महत्त्व |
, |
मानव विज्ञान विमर्श |
2019 |
| 163 |
मंजिल की तलाश में कठिन डगर के राही |
डॉ अल्पना सिंह |
बनास जन UGC CARE |
2019 |
| 164 |
रूहेलखंड में सृजित बाल साहित्य की भाषा एवं शैली |
DR. ALOK MISHRA |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2019 |
| 165 |
रेखाओं से रचे अनुभवों के शब्द चित्र |
डॉ अल्पना सिंह |
लमही UGC CARE |
2019 |
| 166 |
लोकनाट्य का स्वरुप और संकट |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
मड़ई |
2019 |
| 167 |
समकालीन जीवन मूल्यों की शिनाख्त |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
लमही |
2019 |
| 168 |
साहित्य और मीडिया शिक्षण |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हंस |
2019 |
| 169 |
हत्याओं और मरती संवेदनाओं के दौर में देवेंद्र |
डॉ अल्पना सिंह |
पाखी |
2019 |
| 170 |
BIHARI BAHUGYATA KE KAVI MULYANKAN |
DURGESH KUMAR RAI |
SHODH PRAWAH |
2018 |
| 171 |
FILMJAGAT - EK ANTHEEN YATRA |
SADHANA |
KASHF |
2018 |
| 172 |
HINDI CINEMA AUR NAARI |
SADHANA |
KASHF |
2018 |
| 173 |
HINDI KAHANI ME YATHARTHPOORN NAYE ANUBHAV |
Dr. Om Prakash Singh |
KASHF |
2018 |
| 174 |
MOHAN RAKESH KI KHANIYON ME PATRA EVAM CHARITRA CHITTRAN |
DURGESH KUMAR RAI |
THE ORIGINAL SOURCE |
2018 |
| 175 |
RITIKALIN TATHYASRIT UKATIYAN |
DURGESH KUMAR RAI |
CURRENT JOURNAL |
2018 |
| 176 |
आदिमराग सुहाग का - उजियारे का पर्व |
सविता मिश्रा |
कृतिका |
2018 |
| 177 |
उपनिवेश और भारतेन्दु युग की हिन्दी |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शब्द-विधान |
2018 |
| 178 |
एक था कलाकार -एक मूल्यांकन |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2018 |
| 179 |
नज़ीर के काव्य में सामाजिक तत्व: एक विश्लेषण |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नईम |
अनभै साँच |
2018 |
| 180 |
नागार्जुन एवं उनके उपन्यास |
DR.VANDANA |
शोध सरिता |
2018 |
| 181 |
'नागार्जुन के उपन्यासों में चित्रित ग्राम्य जीवन के विविध आयाम' |
युगल |
शोध दर्पण (इंटरनेशनल रेफ़रीड जनरल यूजीसी नं0 45149) |
2018 |
| 182 |
नागार्जुन के उपन्यासों में चित्रित ग्राम्य जीवन के विविध आयाम pp- |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान, डॉ. मोहम्मद साजिद खान |
शोध दर्पण |
2018 |
| 183 |
प्रेमचंद के साहित्य में समाज दर्शन |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
शोध संदर्श |
2018 |
| 184 |
भीष्म साहनी के नाटकों में मिथकीय एवं रंगमंचीय प्रयोग |
DR. ALOK MISHRA |
REMARKING IN ANALISATION |
2018 |
| 185 |
'मध्यवगींय जीवन का 'रोज़' आज भी' |
एकल |
द इटर्निटी (इंटरनेशनल रेफरीड जनरल यूजीसी नं0 44958) |
2018 |
| 186 |
मनुष्य माने जाने का संघर्श - नाला सोपारा |
सविता मिश्रा |
मुक्तांचल |
2018 |
| 187 |
महेंद्र कार्तिकेय का बिम्ब विधान |
डॉ निशात बानो |
EDU WORLD |
2018 |
| 188 |
वर्तमान परिपेक्ष में गांधी दर्शन के विविध आयाम |
DR.VANDANA |
ATARAXIA |
2018 |
| 189 |
समाजिक विद्रूपता के कवि निराला |
DR. ALOK MISHRA |
JETIR |
2018 |
| 190 |
हँसी का सौन्दर्य |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2018 |
| 191 |
हरिशंकर परसाई एवं शरद जोशी की व्यंग्य यात्रा |
DR. ALOK MISHRA |
SHRINKHALA EK SHODHPARAK VAICHARIK PATRIKA |
2018 |
| 192 |
हिंदी पत्रकारिता की सम्भावना और चुनौतियाँ |
डॉ अल्पना सिंह |
समागम Refereed Research Journal |
2018 |
| 193 |
हिन्दी पत्रकारिता और ‘बालसखा’ |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान, डॉ. मोहम्मद साजिद खान |
The Eternity |
2018 |
| 194 |
'हिन्दी बाल पत्रकारिता और 'बालसखा' |
युगल |
द इटर्निटी (इंटरनेशनल रेफरीड जनरल यूजीसी नं0 44958) |
2018 |
| 195 |
‘सूखा बरगद’ में अभिव्यक्त मुस्लिम समाज का मनोविज्ञान |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
शोध संदर्श |
2017 |
| 196 |
ANCHINHE SUFI SADHAK |
SADHANA |
KASHF |
2017 |
| 197 |
BHARTENDU KE KAVYA ME BHAKTI EVAM SAMVEDNA |
DURGESH KUMAR RAI |
THE ORIGINAL SOURCE |
2017 |
| 198 |
DINKAR KE KAVYA MEIN DEV SANSKRITI |
SADHANA |
SHODHMALA |
2017 |
| 199 |
HINDI SAHITYA ME DALIT CHINTAN KE SOOTRADHAR -SIDHH SARAHAPA |
DR. ARUN KUMAR |
ABHINAV MEEMANSHA |
2017 |
| 200 |
LUGDI SAHITYA KA SAMAJIK AVDAAN |
SADHANA |
KASHF |
2017 |
| 201 |
SABARI SAMPRADAY : HAZARAT ALI AHAMAD SABIR |
Dr. Om Prakash Singh |
KASHF |
2017 |
| 202 |
SWARAJYA KE SARVPRATHAM UDGHOSHAK MAHARISHI DAYANAND |
DR BEENA RUSTAGI |
PRAGYA SHIKSHAN SHODH RACHNA |
2017 |
| 203 |
अंबेडकर चिंतन और उनका आंदोलन |
|
समाज दर्शी शोध पत्रिका हापुड़ |
2017 |
| 204 |
अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
कथाक्रम |
2017 |
| 205 |
अम्बेडकर के चिंतन में समता के मूल तत्व |
डॉ निशात बानो |
प्रज्ञा शिक्षण शोध रचना |
2017 |
| 206 |
आज की हिन्दी बाल कविताएं : कल्पना की नई उड़ान |
डॉ. मोहम्मद साजिद खान, डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
शोध संदर्श |
2017 |
| 207 |
'आज की हिन्दी बाल-कविताएँ: कल्पना की नई उड़ान' |
युगल |
शोध संदर्श (अंतर्राष्ट्रीय रेफरीड जनरल) |
2017 |
| 208 |
इतिहास में गुम एक संघर्ष |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2017 |
| 209 |
किताब बनाम रिमोट |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2017 |
| 210 |
खाते पीते सूअरों की शताब्दी में उदय प्रकाश होना |
डॉ अल्पना सिंह |
पहल, UGC CARE |
2017 |
| 211 |
गाँधी का गांव |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हिन्दुस्तानी जबान |
2017 |
| 212 |
चले आइये चौक के इश्क में |
डॉ अल्पना सिंह |
समकालीन भारतीय साहित्य UGC CARE |
2017 |
| 213 |
छायावादी काव्य के प्रमुख तत्व |
, |
HUMANITY - SCIENCE INTERFACE |
2017 |
| 214 |
तीसरी सत्ता का संघर्ष |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2017 |
| 215 |
नये दौर का सिनेमा |
डॉ.चंद्रभान सिंह यादव |
सामयिक सरस्वती |
2017 |
| 216 |
नाम के बहाने |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2017 |
| 217 |
प्रगतिशील कविता स्वरूप और विकास |
DR.VANDANA |
अनुकृति |
2017 |
| 218 |
प्रेमचंद के सामाजिक सरोकार |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
साहित्य भारती |
2017 |
| 219 |
भक्ति काव्य मूल्य और प्रासंगिकता |
डॉ. शशि प्रभा |
भक्तिकालीन कविता : भारतीय संस्कृति के विविध आयाम |
2017 |
| 220 |
भक्तिकाव्य में आधुनिकता |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
जनसत्ता [समाचार पत्र] |
2017 |
| 221 |
भारतीय नारी की दशा एवं दिशा : एक चिन्तन |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
अन्तर्राष्ट्रीय सैद्धांतिक समीक्षा |
2017 |
| 222 |
महाप्रस्थान : एक कथात्मक विवेचन |
DR. ALOK MISHRA |
JANAK : A JOURNAL OF HUMANITIES |
2017 |
| 223 |
मीराबाई के काव्य की भक्ति और दार्शनिकता पर सम्पन्न शोध कार्यो का स्वरुप सम्भावनए और राष्ट्रीय महत्व |
डॉ बबलू सिंह |
समाजदर्शी शोध पत्रिका |
2017 |
| 224 |
मुबारक बेगम एक टिप्पणी |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
2017 |
2017 |
| 225 |
रामकुमार वर्मा के नाटकों का समीक्षात्मक अध्ययन |
DR. ALOK MISHRA |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2017 |
| 226 |
लुग्धि साहित्य और राजहंस का उपन्यास बेदर्द जधमाना |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2017 |
| 227 |
विश्वास ज़िन्दा है (समीक्षा) |
सविता मिश्रा |
नयी धारा |
2017 |
| 228 |
समय से संवाद करती कहानियाँ |
डॉ अल्पना सिंह |
बनास जन UGC CARE |
2017 |
| 229 |
हिंदी: देश और विदेश में |
|
हिंदी को वैश्विक महत्ता |
2017 |
| 230 |
हिंसा क्यों है इतनी पूरब की हवा में |
डॉ अल्पना सिंह |
समालोचन |
2017 |
| 231 |
हिन्दी कविता : व्यंग्य की विकास यात्रा |
DR. ALOK MISHRA |
JANAK : A JOURNAL OF HUMANITIES |
2017 |
| 232 |
हिन्दी का वैश्विक सन्देश |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
Aryavart shodh vikas patrika |
2017 |
| 233 |
‘आज का बालक और शकुन्तला कालरा की बाल-कविताएँ’ |
|
जर्नल ऑफ़ सोशल साइंसेज एण्ड ह्यूमिनिटीज़ : फ़ज़र्लुरहमान ख़ाँ एडवांस रिसर्च सेंटर, जी0 एफ0 कॉलेज, शाहजहाँपुर ,उ0 प्र0, भारत |
2016 |
| 234 |
AAG KA DARIYA KE KATHYA KA VISHLESHANATMAK ADHYAYAN |
Dr. DARAKHASHAN BEE |
JOURNAL OF SOCIAL SCIENCES AND HUMANITIES |
2016 |
| 235 |
CHITRALEKHA : AITIHASIK PRISHTHBHOOMI ME AADHUNIK BHAV-BODH (PAGE 62-65) |
Dr. Om Prakash Singh |
SHODH SANCHAR BULLETIN |
2016 |
| 236 |
KITNE PAKISTAN: EK RAJNITIK ADHYAYAN |
Dr. DARAKHASHAN BEE |
ANWAR-E-TAHQEEQ |
2016 |
| 237 |
PREMCHAND AUR ALOCHANATAMK CHUNAUTIYAN |
DURGESH KUMAR RAI |
SODHA CETANA |
2016 |
| 238 |
अवधी भाषा और उसके साहित्य पर सम्पन्न भाषा वैज्ञानिक शोधकार्यो का स्वरुप और महत्व |
डॉ बबलू सिंह |
समाजदर्शी शोध पत्रिका |
2016 |
| 239 |
आज का भारत और 'भारत भारती' |
डॉ अल्पना सिंह |
अपनी माटी (ई मगज़ीन) |
2016 |
| 240 |
उत्तर आधुनिकता और मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास |
डॉ. शशि प्रभा |
शोध दिशा, अक्टूबर-दिसम्बर 2016 |
2016 |
| 241 |
उपभोक्तावादी संस्कृति का वर्चस्व और स्त्री |
डॉ अल्पना सिंह |
विचार (Referred Journal) |
2016 |
| 242 |
एकता के भाषाई सूत्र |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2016 |
| 243 |
कीर्ति शेष : राष्ट्र कवि दिनकर |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
शोध मंथन |
2016 |
| 244 |
'नैतिकता के प्रश्न और आज की बाल-कविताएँ |
युगल |
शोध संदर्श (अंतर्राष्ट्रीय रेफरीड जनरल) |
2016 |
| 245 |
नैतिकता के प्रश्न और बाल कविताएं |
डॉ. मोहम्मद साजिद खान, डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
शोध संदर्श |
2016 |
| 246 |
पत्नी और जैनेन्द्र का नारी चिंतन |
डॉ0 मोहम्मद अरशद खान |
शृंखला |
2016 |
| 247 |
बँटवारे के बाद का मुस्लिम समाज और ‘ज़िंदा मुहावरे’ उपन्यास |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
शोध संदर्श |
2016 |
| 248 |
बाल साहित्य की चुनौतियाँ |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
वागप्रवाह |
2016 |
| 249 |
बाल साहित्य की विकासयात्रा: एक विहंगावलोकन |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
Journal of Social Sciences & Humanities |
2016 |
| 250 |
भारतीय नारी और घरेलु हिंसा |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
International Journal of research |
2016 |
| 251 |
राष्ट्रीय चेतना के सन्दर्भ में प्रेमचंद की कहानियों का विश्लेषण |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
JETIR |
2016 |
| 252 |
रीतिकाल में रचित उर्दू साहित्य |
प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित |
खोज |
2016 |
| 253 |
शंभु बादल की चुनी कविताओं में सामाजिक सरोकार |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2016 |
| 254 |
समकालीन हिंदी कविता कोश |
सविता मिश्रा |
भाषा |
2016 |
| 255 |
समकालीन हिंदी गजल : एक बहस |
|
समाजदर्शी शोध पत्रिका हापुड़ |
2016 |
| 256 |
सांस्कृतिक धरोहर की हकीकत |
डॉ अल्पना सिंह |
जनसत्ता (राष्ट्रीय हिंदी दैनिक) |
2016 |
| 257 |
सोज़-ए-वतन और ‘कथा सम्राट’ प्रेमचंद |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
शोध वैचारिकी |
2016 |
| 258 |
स्त्री-चिंतन का उद्भव और विस्तार |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
समाज कल्याण |
2016 |
| 259 |
‘ज़रूरत व्यावहारिक बाल-साहित्य की’ |
एकल |
‘आजकल’ : केयर लिस्टेड राष्ट्रीय जनरल, केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार |
2015 |
| 260 |
‘डॉ0 शकुंतला कालरा का बालिका केन्द्रित काव्य’ |
एकल |
‘वाग्प्रवाह’, (पियर रिव्यु जनरल) |
2015 |
| 261 |
Ashtachapiye kavi Parmanada Das : Vayktitvye avam kratitvya |
Dr Sushma Pal |
Shodh Sanchar Bulleten |
2015 |
| 262 |
Ashtchapiye Kavi krishnkas kavye mein alankar vidhaan |
Dr. Sushma Pal |
Shodh Amrit |
2015 |
| 263 |
BHARTIYA SAMASIK SANSKIRITI AUR NAZEER AKBARABADI |
Dr. DARAKHASHAN BEE |
TALASH |
2015 |
| 264 |
Naari Tumhe Salam |
Dr. Pavan Kumar Trivedi |
AVSAR |
2015 |
| 265 |
PREMCHAND KI KAHANIYON MEIN STRI SAMASYA :SUBHAGI TATHA DHIKKAR KE VISHESH SANDARBH MEIN |
Dr. DARAKHASHAN BEE |
JOURNAL OF SOCIAL SCIENCES AND HUMANITIES |
2015 |
| 266 |
Role of literature to build confidence between INDO – PAK relations : An analysis |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
Survey of social sciences |
2015 |
| 267 |
UTTAR ADHUNIKTABAD EVAM ALOCHANA KI AVDHARANA |
DURGESH KUMAR RAI |
SODHA CETANA |
2015 |
| 268 |
VARTMAN PARIVESH ME GANDHIVADI CHINTAN KI PRASANGIKATA |
DR. ARUN KUMAR |
SHODH PARIDHI |
2015 |
| 269 |
आज़ादी के बाद का भारतीय मुसलमान और हिन्दी उपन्यास |
डॉ0 मोहम्मद अरशद खान |
शृंखला |
2015 |
| 270 |
कोड मिश्रण तथा कोड अंतरण |
डॉ. शशि प्रभा |
शोध दिशा |
2015 |
| 271 |
गुरु नानक देव के काव्य में सामाजिक राजनितिक चेतना के स्वर |
DR PARAMJEET KAUR |
MUMUKSHU JOURNAL OF HUMANITIES |
2015 |
| 272 |
गोदान में प्रयुक्त अशिक्षित पात्रों के संवादों की भाषा का समाज भाषा वैज्ञानिक अध्ययन |
Dr. Anju Bansal |
समाजदर्शी शोध पत्रिका |
2015 |
| 273 |
जनसंचार :परम्परा और प्रयोग |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
कथाक्रम |
2015 |
| 274 |
ज़मीनी सच की कलात्मक अभिव्यक्ति -कुंवर बेचैन की गज़लें |
सविता मिश्रा |
रिर्सच लिंक |
2015 |
| 275 |
तुलसी का भक्ति सिद्धांत |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
JETIR |
2015 |
| 276 |
दलित आत्मकथाओं में स्त्री और लोकजीवन |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
नया ज्ञानोदय |
2015 |
| 277 |
बढ़ती हुई जनसंख्या और पर्यावरण |
डॉ. शशि प्रभा |
On 'Our environment,today and tomorrow' |
2015 |
| 278 |
बिजनौर जनपद में स्वतंत्रता पूर्व की पत्रकारिता |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2015 |
| 279 |
बिजनौर से निकलने वाला उर्दू अखबार मदीना की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2015 |
| 280 |
भारतीय लोक संस्कृति के सच्चे संवाहक : हिंदी के लोकगीत |
DR PARAMJEET KAUR |
JANAK : A JOURNAL OF HUMANITIES |
2015 |
| 281 |
महादेवी का पुनर्मूल्यांकन |
डॉ. मोहम्मद काशिफ नईम |
मंदाकिनी |
2015 |
| 282 |
महान कवि हरिवंश राय बच्चन |
DR. ALOK MISHRA |
IJIRSET |
2015 |
| 283 |
राही और नीम का पेड़ |
डॉ. मोहम्मद अरशद खान |
सृजन कुंज |
2015 |
| 284 |
लोकधर्मी साहित्य की दूसरी धारा |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
वागर्थ |
2015 |
| 285 |
वर्तमान परिवेश में बच्चों के मानसिक स्वास्थय हेतु खेलकूद की भूमिका |
डॉ बबलू सिंह |
शोध परिधि |
2015 |
| 286 |
वृन्दावन लाल का उपन्यासों में दलित चेतना |
डॉ बबलू सिंह |
नमन |
2015 |
| 287 |
वैश्विक संदर्भ में राष्ट्र भाषा हिंदी की स्थिति |
डॉ बबलू सिंह |
समज्दर्शी शोध पत्रिका |
2015 |
| 288 |
सामाजिक दलित चेतना के अग्रदूत :भक्त रविदास |
DR PARAMJEET KAUR |
साहित्यायन |
2015 |
| 289 |
स्पेस की तलाश में स्त्री |
सविता मिश्रा |
रिसर्च लिंक |
2015 |
| 290 |
हाशिये का समाज:सोच और सरोकार |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
समकालीन भारतीय साहित्य |
2015 |
| 291 |
हिंदी अनुवाद चिंतन की परंपरा |
प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित |
खोज |
2015 |
| 292 |
हिंदी दलित कविता में सौंदर्यशास्त्र |
|
समाज दर्शी शोध पत्रिका हापुड़ |
2015 |
| 293 |
1947 SE POORV KI HINDI PATRAKARITA |
SADHANA |
KASHF |
2014 |
| 294 |
AAG KA DARIYA: EK SANSKRITIK ADHYAYAN |
Dr. DARAKHASHAN BEE |
TALASH |
2014 |
| 295 |
Enviromental Pollution |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
कवितांजलि |
2014 |
| 296 |
LOK SANSKRITI KE SANDARBH ME SAHITYAKA BADALTA SWAROOP |
DR,ARUN KUMAR |
SHODH PARIDHI |
2014 |
| 297 |
Urvashi Kavya mein Dinkar ki Kavya Chetna |
Dr. Shyam Pal Maurya |
Lohia Shodh Manch |
2014 |
| 298 |
अहिंदी भाषी क्षेत्र और हिंदी |
|
हिंदी दशा और दिशा |
2014 |
| 299 |
आँसू का आलंकारिक सौन्दर्य |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
अन्तर्राष्ट्रीय सैद्धान्तिक समीक्षा |
2014 |
| 300 |
कला और साहित्य में नारी |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दिशा |
2014 |
| 301 |
कामायनी में रीति-तत्त्व |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
यूनिवर्सिटी हिंदी जर्नल |
2014 |
| 302 |
गठरी बंधी साड़ियों के रंग - पाठकों के मर्म को छूती कवितायें |
सविता मिश्रा |
कश़्फ |
2014 |
| 303 |
गोदान का अगला भाग है ' जीवन युद्ध' |
|
शोध समालोचन, गाजियाबाद |
2014 |
| 304 |
दलित आप बीतियों में हैं दर्द के कई चहरे |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हंस |
2014 |
| 305 |
नरक का व्याकरण |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
लमही |
2014 |
| 306 |
निराला का कथा साहित्य |
डॉ निशात बानो |
समाज विज्ञान शोध पत्रिका |
2014 |
| 307 |
नीरजा! जिस पर भारत ही नहीं पाकिस्तान, अमेरिका को भी है गर्व |
DR. ALOK MISHRA |
IJIRSET |
2014 |
| 308 |
नेहरू जी का सामाजिक विचार |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
Gyandayani samaj vigyan shodh |
2014 |
| 309 |
पद्माकर के काव्य में फाग के रंग |
डॉ अल्पना सिंह |
सम्यक भारत |
2014 |
| 310 |
परम्परा और आधुनिकता-बोध |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दिशा |
2014 |
| 311 |
बीसवीं सदी की महिला कहानी कारों का सामाजिक चिंतन |
डॉ. शशि प्रभा |
शोध दिशा |
2014 |
| 312 |
मीडिया में महिलाएं |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
जनसत्ता [समाचार पत्र] |
2014 |
| 313 |
वैश्वीकरण के संदर्भ में हिंदी भाषा के संरचनात्मक और प्रकार्यपरक स्वरुप का विवेचन |
डॉ बबलू सिंह |
समाज विज्ञान शोध पत्रिका |
2014 |
| 314 |
शोध कार्यो का सामाजिक विकास में महत्त्व |
डॉ बबलू सिंह |
समय आगम |
2014 |
| 315 |
स्त्री बनाम स्त्री |
डॉ अल्पना सिंह |
दलित साहित्य वार्षिकी 2014 |
2014 |
| 316 |
हिन्दी नाट्य साहित्य में प्रयोगशीलता - शंकर शेष के नाटक के विशेष सन्दर्भ में एक विश्लेषण |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
JETIR |
2014 |
| 317 |
हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में योग एवं वर्तमान सामाजिक सन्दर्भ में योग की प्रासंगिकता |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
समाज विज्ञान शोध पत्रिका |
2014 |
| 318 |
‘आवश्यक है बाल-कविता के लिए छंद’ |
|
‘भाषा’ : केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा-विभाग), भारत सरकार, नई दिल्ली |
2013 |
| 319 |
‘कविता बनाम बाल कविता’ |
|
‘बाल वाटिका’: भीलवाड़ा, राजस्थान |
2013 |
| 320 |
BILASPUR JANPAD KI LOKGAATHAO MEIN JAATIYA JIWAN |
SADHANA |
KASHF |
2013 |
| 321 |
JAN AANDOLAN BANAM DALIT SAMAJ |
Dr. Om Prakash Singh |
GURUKUL-SHODHPRABHA |
2013 |
| 322 |
KABIR AUR TULSI KI BHAKTI BHAWNA |
DURGESH KUMAR RAI |
ANUSANDHITSU |
2013 |
| 323 |
SAHITYA KI GALIYON MEIN GHUMTA VASANT |
SADHANA |
SHODHMALA |
2013 |
| 324 |
TULSI KE KAVYA ME STREE VIMARSH |
DURGESH KUMAR RAI |
ANUSANDHITSU |
2013 |
| 325 |
VISHV KE DHARATAL PAR HINDI |
SADHANA |
KASHF |
2013 |
| 326 |
आपातकाल और हिंदी उपन्यास |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
लमही |
2013 |
| 327 |
क्या स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भारत का विभाजन अनिवार्य था ? |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
Journal of Humanities & Social Sciences |
2013 |
| 328 |
जीवन के अरण्य का सुवास पानी भीतर फूल |
सविता मिश्रा |
इन्द्रप्रस्थ भारती |
2013 |
| 329 |
वर्तमान लोकतंत्र |
डॉ अल्पना सिंह |
सेवा चेतना (अर्धवार्षिक शोध पत्रिका ) |
2013 |
| 330 |
विश्व शांति की शिक्षा : भगवान बुध के संदर्भ में |
|
शोध परिधि, प्रेरणा साहित्य समिति हापुड, उत्तर प्रदेश |
2013 |
| 331 |
संत संहिता बाई की हिंदी वाणी |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2013 |
| 332 |
हिंदी के प्राचीन प्रमुख मुस्लमाम कवि |
प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित |
खोज |
2013 |
| 333 |
हिंदी छायावादी काव्य में मानव मूल्य |
DR PARAMJEET KAUR |
IOSR JOURNAL OF HUMANITIES AND SOCIAL SCIENCE |
2013 |
| 334 |
हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन युग में परमेश्वर की भक्ति के लिए एक महान प्रवर्तक कबीर |
DR. ALOK MISHRA |
IJIRSET |
2013 |
| 335 |
हिंदी सिनेमा में स्त्री सशक्तिकरण |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हिमांजलि |
2013 |
| 336 |
‘निर्मला पुतुल की कविताएँ :संथाली भावभूमि का सार्थक चेहरा’ |
|
‘भाषा’ : केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय(उच्चतर शिक्षा-विभाग), भारत सरकार, नई दिल्ली |
2012 |
| 337 |
NARI SSHAKTIKARAN PARAMPRA AUR PRAVESH |
DR BEENA RUSTAGI |
SAMAJ VIGYAN SHODH PATRIKA |
2012 |
| 338 |
PATRKARITA KE VIVIDH AAYAM |
DR BEENA RUSTAGI |
SAMAJ VIGYAN SHODH PATRIKA |
2012 |
| 339 |
PRACHIN BHARTIYA SAHITYA ME JANPAKSHIYA PARAMPARA |
Dr. Om Prakash Singh |
GURUKUL SHODHPRABHA |
2012 |
| 340 |
SARAHPA SAHITYA ME SAMAJIK NAVACHAR |
DR. ARUN KUMAR |
PERIODIC RESEARCH |
2012 |
| 341 |
छुपाए हैं वेदना का अनंत सागर |
|
सम्यक भारत दिल्ली |
2012 |
| 342 |
दलित हिंदी उपन्यासों में प्रश्न और प्रतिरोध |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
शोध समीक्षा |
2012 |
| 343 |
निराला : अद्वैतवाद के मानवतावादी व्याख्याता |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
अनुसंधानिका |
2012 |
| 344 |
प्रेमचंद पर गांधीवाद का प्रभाव |
डॉ निशात बानो |
समाजविज्ञान शोध पत्रिका |
2012 |
| 345 |
भारतेंदु ka अनुवाद संबंधी प्रक्रिया विश्लेषण |
प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित |
खोज |
2012 |
| 346 |
विज्ञापन में महिला देह और दर्द |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
बयान |
2012 |
| 347 |
शिकंजे का दर्द यानी शोषण का समुद्र |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
प्रगतिशील वसुधा |
2012 |
| 348 |
हरिशंकर परसाई के उपन्यासों का रचना -तंत्र |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
विजडम हेराल्ड |
2012 |
| 349 |
'हिन्दी' भाषा एक नव्य दृष्टि |
Dr.(Smt.) Kanchan Singh |
समाज विज्ञान शोध पत्रिका |
2012 |
| 350 |
‘टूट रही हैं शिशु ,बाल, किशोर-साहित्य के वर्गीकरण की सीमाएँ’ |
|
‘बालवाटिका’ : भीलवाड़ा, राजस्थान |
2011 |
| 351 |
BHARTIYA PREMAKHYAN AUR CHITAI KA KAVYA |
SADHANA |
KASHF |
2011 |
| 352 |
MANAVADHIKAR KEE AVDHARNA AUR NAARI |
DR BEENA RUSTAGI |
SAMAJ VIGYAN SHODH PATRIKA |
2011 |
| 353 |
अनुवाद प्रक्रिया का उदभव और विकास |
प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित |
खोज |
2011 |
| 354 |
इश्तिहार में देह |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
जनसत्ता [समाचार पत्र] |
2011 |
| 355 |
दलित कहानियों में चित्रित सामाजिक समस्याएं |
|
वाकप्रवाह लखनऊ |
2011 |
| 356 |
दलित साहित्य की सार्थकता |
|
शोध धारा उरई जालौन |
2011 |
| 357 |
भय ,भेद और भूख का नया समाजशास्त्र |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
शोध सृजन |
2011 |
| 358 |
समकालीन कविता में दलित चेतना |
सविता मिश्रा |
कश्फ़ |
2011 |
| 359 |
‘रैस्व : सहज मानवीय संवेदनाओं का वाहक’ (‘अनामदास का पोथा’ के संदर्भ में) |
|
'जर्नल ऑफ़ सोशल साइंसेज एण्ड ह्यूमिनिटीज़', फ़ज़र्लुरहमान ख़ाँ एडवांस रिसर्च सेंटर, जी0 एफ0 कॉलेज, शाहजहाँपुर ,उ0 प्र0, भारत |
2010 |
| 360 |
BHARTENDU HARISHCHANDR KI JANDHARMITA |
Dr. Om Prakash Singh |
RESEARCH ANALYSIS AND EVALUATION |
2010 |
| 361 |
JENENDRA VYKTITV OR VYAKTIVADI CHEETNA |
GRIRAJSHARAN AGARWAL |
SHODHDISHA |
2010 |
| 362 |
NAGARJUN KI JANPAKSHADHARATA |
Dr. Om Prakash Singh |
SHODH SAMIKSHA AUR MULYANKAN |
2010 |
| 363 |
PARAMPRAGAT SAHITY MEN SANNIHIT HAI SHIV KA VAIVIDHYA |
DR BEENA RUSTAGI |
KRITIKA |
2010 |
| 364 |
कबीर के काव्य में काल और कामिनी |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
हिंदी अनुशीलन |
2010 |
| 365 |
निराला की काव्य यात्रा का विकास |
|
विकास संस्कृति बिलासपुर छत्तीसगढ़ |
2010 |
| 366 |
भारतेंदु कृत अनुदित साहित्य |
प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित |
खोज |
2010 |
| 367 |
मीराबाई : स्त्री मुक्ति का स्वर |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
राष्ट्रीय सहारा |
2010 |
| 368 |
सत्ता विमर्श के लिए ज़रूरी प्रतिरोधी पाठ |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
dastavez |
2010 |
| 369 |
डॉ. रांगेय राघव के उपन्यास : एक परिचय |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
शोध दिशा |
2009 |
| 370 |
प्रेमचंद के उपन्यास और सत्ता विमर्श |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
पाखी |
2009 |
| 371 |
स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी उपन्यास के शिल्प पर राजनीतिक यथार्थ का प्रभाव |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
मध्य भारती |
2009 |
| 372 |
एक सफ़र : ज़ल्ख्म से जिरह तक |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
प्रस्थान |
2008 |
| 373 |
प्रेमचंद की आलोचना दृष्टि |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
लमही |
2008 |
| 374 |
सरस्वती और नारी चेतना |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
दस्तावेज़ |
2008 |
| 375 |
स्त्री विमर्श के आईने में मीरा का काव्य |
डॉ चंद्रभान सिंह यादव |
बहुवचन |
2008 |
| 376 |
स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी उपन्यास और साम्यवाद |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
विश्वभारती |
2008 |
| 377 |
हिंदी उपन्यास और भारत में लोकतंत्र ,धर्म और जातिवाद का समीकरण |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
शोध दिशा |
2008 |
| 378 |
AGYEY KA VYKTIV VESHITHY OR KAL-CHINTAN |
GRIRAJSHARAN AGARWAL |
SODHDISHA |
2007 |
| 379 |
कामायनी में बिम्ब विधान |
डॉ. शशि प्रभा |
शोध दिशा, अक्टूबर-दिसम्बर 2016 |
2007 |
| 380 |
औपन्यासिक रस्ते से साम्प्रदायिकता की तहों में पैठ |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
उत्तर प्रदेश |
2005 |
| 381 |
नागार्जुन का निबंध साहित्य |
उन्मेष कुमार सिन्हा |
संस्मृति सुधा |
2004 |
| 382 |
मानस में रस- व्यंजना |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
तुलसी पंचशती स्मृति-पारिजात |
2000 |
| 383 |
व्यावहारिक वेदान्त दर्शन और निराला काव्य |
डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा |
अमृत पु्त्र निराला (पुस्तक) |
1997 |